लखनऊ एक नवाबो का शहर है जो तहजीब एवं नफासत पसंदगी के लिए विश्व प्रसिद्ध है यहाँ की इमरतो का बहुत बड़ा इतिहास है इसके साथ ही साथ चिकनकारी एवं ज़री-ज़रदोज़ी में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
लखनऊ पॉपुलेशन वाला शहर उत्तर प्रदेश की राजधानी कभी नवाबों का शहर (City Of Nawabs) कहलाता था इसकी पुरानी इमारतें देश भर में अपनी एक अलग पहचान बनाती है यह गोमती नदी के किनारे बसा हुआ लखनऊ भारतीय इतिहास में कई बड़ी घटनाओं का साक्षी भी रहा है
अवध के राजाओ ने शहर को आबाद किया यहाँ अपनी हर निसानिया छोड़ कर गए है जैसे की छोटा इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा, छतर मंजिल, रेजीडेंसी, बारादरी, दिलकुशा, शाहनजफ इमामबाड़ा ऐसे काफी अद्भुत स्मारक चिन्ह लखनऊ को एक अलग पहचान देते हैं भारत में एक कहावत कही जाती है
इतिहास
ये आपको जानना इसलिए जरुरी है क्योकि किसी भी शहर को जाने से पहले उसका इतिहास जानना जरुरी है इस शहर की जानकारी मध्य काल के बाद ही पता चलता है जिसमे अयोधा का भी काफी विशेष महत्व रहा है सबसे पहले मुग़ल बादशाह के समय अकबरी दरवाजे का निर्माण हुआ था. जहांगीर और शाहजहां के जमाने में भी यहां इमारतें बनीं
1720 मुहम्मदशाह के समय दिल्ली का मुग़ल साम्राज्य टूटने लगा था. 1720 ई. में अवध के सूबेदार सआदत खां ने लखनऊ में अपनी साम्राज्य कायम कर लिया और यहां से शिया मुस्लिमों के नवाबों की परंपरा की शुरुआत हो गयी. इसके बाद लखनऊ में सफ़दरजंग, शुजाउद्दौला, ग़ाज़ीउद्दीन हैदर, नसीरुद्दीन हैदर, मुहम्मद अली शाह और लोकप्रिय नवाब वाजिद अली शाह ने शासन किया था.
फैजाबाद से लखनऊ की नवाबों की राजधानी
नवाब आसफ़ुद्दौला (1795-1797 ई.) के काल में राजधानी फैजाबाद से लखनऊ लाई गई. आसफ़ुद्दौला के जमाने में लखनऊ में रूमी दरवाज़ा ,बड़ा इमामबाड़ा और आसफ़ी मस्जिद आसफ़ुद्दौला के ही अन्य कई प्रसिद्ध भवन, बाज़ार और दरवाज़े बनवाये गए थे
1856 में अंग्रेज़ों ने वाजिद अली शाह को गद्दी से हटाकर अवध की रियासत की समाप्त कर दी और उसे ब्रिटिश भारत में मिला लिया ।
चिकनकारी कढ़ाई का इतिहास
चिकनकारी कढ़ाई की शुरुआत मुगल युग में हुई थी। ऐसा माना जाता है कि महारानी नूरजहाँ ने भारत में इस कला को पेश किया था। समय के साथ, लखनऊ अपने चिकनकारी काम के लिए प्रसिद्ध हो गया, जिससे यह शालीनता और शान का प्रतीक बन गया।
चिकनकारी काम के प्रकार
चिकनकारी कढ़ाई के विभिन्न रूप हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना एक अद्वितीय शैली और डिज़ाइन होता है। इनमें से कुछ मशहूर रूप हैं:
- फ्लैट स्टिच (टेपची, बखिया और हूल)
ये स्टिच कपड़े पर सॉफ्ट और यथार्थवादी पैटर्न बनाते हैं, जिससे यह हल्का और सुंदर दिखाई पड़ता है। - उभरे हुए स्टिच (मुर्री और फंदा वर्क)
कपड़े पर छोटी-छोटी गांठें और उभरे हुए डिज़ाइन सिल दिए जाते हैं, जिससे कढ़ाई समृद्ध और विस्तृत दिखती है। - जाली वर्क
ऐसी कढ़ाई से जालीदार पैटर्न बनते हैं, जिससे कपड़ा लेस जैसा दिखता है। - शैडो वर्क
कढ़ाई कपड़े के पीछे की तरफ की जाती है, जिससे सामने की तरफ एक मुलायम छाया प्रभाव पैदा होता है।
चिकनकारी के लिए लखनऊ सबसे अच्छी जगह क्यों है?
लखनऊ चिकनकारी कढ़ाई का शहर है। कुशल कारीगर पीढ़ियों से चिकनकारी के कपड़े तैयार करते आ रहे हैं। शहर की पारंपरिक कार्यशालाएँ और हथकरघा केंद्र भारत में कुछ बेहतरीन चिकनकारी कपड़े बनाते रहते हैं।
प्रामाणिक और हस्तनिर्मित कार्य
लखनऊ में चिकनकारी कढ़ाई पैरों के बल की जाती है, जिससे बेहतरीन गुणवत्ता और जटिल पैटर्न सुनिश्चित होते हैं। कई कारीगर इस कला को निखारने में सालों लगाते हैं, जिससे हर टुकड़ा खास बन जाता है।
विविध डिज़ाइन
आप लखनऊ में चिकनकारी उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पा सकते हैं, जिसमें कुर्ते और साड़ियाँ से लेकर दुपट्टेऔर लहंगे तक शामिल हैं। कढ़ाई पारंपरिक और आधुनिक दोनों शैलियों में उपलब्ध है।
भारत में सबसे अच्छा चिकनकारी वर्क कहाँ से खरीदें?
यदि आप असली चिकनकारी कढ़ाई की तलाश में हैं, तो यहाँ खरीदारी करने के लिए कुछ बेहतरीन जगहें हैं:
- अमीनाबाद, लखनऊ
अमीनाबाद लखनऊ के सबसे पुराने बाज़ारों में से एक है, जहाँ आप किफायती दामों पर हस्तनिर्मित चिकनकारी के कपड़े पा सकते हैं। - चौक मार्केट, लखनऊ
यह बाज़ार अपने पारंपरिक हाथकरघा स्टोर के लिए प्रसिद्ध है, जहां शुद्ध और उच्च गुणवत्ता की चिकनकारी कढ़ाई की ज्यादातर उपलब्धियाँ हैं। - हज़रतगंज, लखनऊ
कई ब्रैंडेड और बुटीक स्टोर वाला एक अपस्केल शॉपिंग एरिया जो प्रीमियम क्वालिटी के चिकनकारी के कपड़े बिकते हैं। - SEWA (स्व-नियोजित महिला संघ), लखनऊ
प्रसिद्ध संगठन है जो स्थानीय कारीगरों का साथ देता है और कुशल कारीगरों से सीधे वास्तविक हस्तनिर्मित चिकनकारी बेचता है। - ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफ़ॉर्म
अगर आप लखनऊ में नहीं हैं, तो भी आप विश्वसनीय वेबसाइट से ऑनलाइन चिकनकारी के कपड़े खरीद सकते हैं जैसे:
- हस्तनिर्मित बनाम मशीन का काम – असली चिकनकारी हाथ से सिली जाती है, जबकि मशीन की कढ़ाई एक समान दिखती है और इसमें हाथ से बने टांकों की सुंदरता नहीं होती।
- गुणवत्ता धागे – शुद्ध चिकनकारी में मुलायम सूती या रेशमी धागे का उपयोग किया जाता है।
- फैब्रिक चेक – एक्विलर चिकनकारी आमतौर पर सूती, मलमल, जॉर्जेट और शिफॉन के ऐसे हल्के कपड़ों पर की जाती है।